Wednesday, August 3, 2016

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में आयोजित श्री रामकथा

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में आयोजित श्री रामकथा में  बालव्यास सोमेश जी महाराज ने कहाँ  पृथ्वी पर भगवान  दुष्टों का संघार करने  नहीं अपितु
                विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ।
 अरे गोस्वामी तुलसीदास बाबा ने रामचरित मानस में खुद ही कहाँ है  प्रभु तो  संतो के लिए गौ के लिए मनुष्यों के कल्याण के लिए पृथ्वी परअवतार लेते हैं न की दुष्टों को मारने के लिए
गीता में भगवान ने कहाँ  हैं  
                यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भावती भारतः ।
               अभ्युथान्म आधार्मास्य्तादात्मनम सृजाम्यहम् ।।
दुष्टों को तो भगवान आने के बाद जाते जाते  इस लिए साफ कर देते हैं  की मै तो यहाँ आया ही हूँ पृथ्वी के इस कूड़े को साफ करता चलू नहीं तो ये आगे गंदगी फैलाते रहेगें ।
         आज सभी देवता भगवान से  प्रार्थना कर के अपने अपनेधाम को चले जाते हैं । आज माता कौशल्य बाल स्वरूप भागवान को गोद में लिए  और वही उनकी समाधि लग गयी
                 सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी ।
                 संभ्रम   चलि   आई  सब  रानी  ।।
सिसु रुदन सुनते ही सुमित्रा,कैकेयी दासी के साथ संभ्रम दौड़ती हुई आयी। करोडो कामदेव को सर्मिन्दा करने वाले ऐसे  दिव्य रूपवान प्रभु  कौशल्या की गोद में रुदन कर रहे हैं । यह देखकर कैकेयी,सुमित्रा  के नेत्र सजल हो उठे । समाधिस्थ कौशल्या  को बंदन  करते हुए  कैकेयी बोली, "माँ ! आपने रघुवंश का उद्धार किया ।  आपने कुल को पर किया पुरे अयोध्या में ये बात फैल गयी  तब
              दशरथ पुत्रजनम सुनी काना । मानहुँ ब्रह्मानन्द समना ।।
 जब यह बात राजा दशरथ के कान में पड़ा तो वो ब्रह्मनन्द में डुब गए ।
             कहने का मुल मतलब की प्रभु के आने की ख़ुशी में राजा दशरथ को आपने देह की सुध बुध नहीं रही  इतने भाव बिभोर हो गए की ब्रह्मानन्द की प्राप्ति हो गई  ही भो क्यों न जिसके घर में स्वयं भगवान आ गए हो उसका क्या कहना राजा दशरथ अपने गले का हर तोड़ तोड़ नेवछावर करने लगे आपने गुरु वाशिष्ठादि गुरुजनों को राज भवन में आये तुलसीदास जी चौपाई में लिखते हैं ।
             परमानन्द पुरि मन राजा ।कहा बोलाई बजावहु बाजा ।।
परमानन्द में डुबे हुए राजा ने घोषणा की ।बाजे वाले को बुलाया जाय और बजा बजवाया जाय
                     

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